‘बधाई हो’ के 3 साल पूरे: सुरेखा सीकरी के संवाद पर बजी थी तालियां, आयुष्मान खुराना ने किया याद

नई दिल्ली. फिल्म ‘बधाई हो’ (Badhaai Ho) को रिलीज हुए आज तीन साल पूरे हो गए हैं. इस फिल्म से न केवल एक्ट्रेस नीना गुप्ता (Neena Gupta ) और एक्टर गजराज राव (Gajraj Rao) के करियर को नई दिशा मिली, बल्कि फिल्ममेकर्स को भी नई राह दिखाई. एक तरह से अमित शर्मा द्वारा निर्देशित यह फिल्म बॉलीवुड की सोच बदल दी. इस फिल्म ने एक बार फिर साबित कर दिया कि अगर कहानी दमदार हो, तो फिल्म बगैर किसी बड़े स्टार के भी हिट हो सकती है.

हांलाकि, फिल्म में आयुष्मान खुराना (Ayushmann Khurrana) और सान्या मल्होत्रा (Sanya Malhotra) की युवा जोड़ी भी मौजूद थी, मगर फिल्म के असली हीरो-हीरोइन तो गजराज राव और नीना गुप्ता थे. यह बात आयुष्मान ने अपने एक इंटरव्यू में भी कही थी, लेकिन इस फिल्म में अपनी एक्टिंग से सबको पीछे छोड़ दिया, वो थीं अभिनेत्री सुरेखा सीकरी (Surekha Sikri), जो अब हमारे बीच नहीं हैं, जुलाई 2021 में उनका निधन हो गया था.

सुरेखा सीकरी ने अपनी दमदार अभिनय से फिल्म ‘बधाई हो’ में जान फूंक दी थी. फिल्म में उन्होंने आयुष्मान की दादी का किरदार निभाया था, जबकि गजराज ने बेटे और नीना गुप्ता ने बहू का रोल किया था. फिल्म में उनकी संवाद अदायगी पर जमकर तालियां बजी थीं. फिल्म में जब उनकी बहू प्रेग्नेंट हो जाती है, तब वो अपने बेटे से पूछती हैं सबसे पहले तो नू जानना है मुझे… टाइम कब मिल गया तुझे… अब सब समझ आ रहा है… क्यों बहू का बदन टूटा करे रोज रोज…  

इसके बाद वो फिर से अपने बेटे और बहू को ताना मारते हुए गंभीरता से कहती हैं- यूं तो बच्चों का काम होता है नाम रोशन करना. तूने तो अपने बच्चों को मौका ही नहीं दिया. मैं तो नकुल को जोक करे थी कि तेरी गोद में बालक देखना चाहूं. तेरी बहू ने तो सीरियसली ले लिया’.

इसी सीन में अचानक गुस्से से वो रेलवे में नौकरी करने वाले बेटे से कहती हैं- ‘अपने आप को सरकारी नौकर बताओ. जब सरकार की बात ही नहीं समझ आ री तो इतने साल से नौकरी कैसे की.

सुरेखा जी को याद करते हुए आयुष्मान खुराना ने इंस्टाग्राम पर उनके साथ वाली एक तस्वीर शेयर की है, साथ ही एक वीडियो भी पोस्ट किया है.

फिल्म में सुरेखा जी की दमदार भूमिका के लिए उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला था. पुरस्कार लेने के लिए वो व्हीलचेयर पर पहुंची थीं. जब वो राष्ट्रपति के हाथों अवॉर्ड ले रही थीं, तो वहां मौजूद सभी लोगों ने खड़े होकर तालियां बजाईं. यह उनका तीसरा नेशनल अवॉर्ड था. 1986 में आई फिल्म ‘तमस’ के लिए उन्हें पहला राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला था. फिर फिल्म ‘मम्मो’ के लिए उन्हें इस अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था.

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