Aalas Motapa Ghabraahat Review: हंसिए अपने ही परिवार पर ‘आलस-मोटापा-घबराहट’

Aalas Motapa Ghabraahat Review: व्यंग्य में और व्यंग्य के बहाने अपना अजेंडा चिपकाने में नीयत का फर्क़ होता है। यदि आप स्टैंड अप कॉमेडियन हैं, व्यंग्य लेखक हैं, तो आप सभी परिस्थितियों, व्यक्तियों और राजनेताओं को साधिकार निशाना बनाए. लेकिन यदि आप किसी एक विशेष वर्ग पर टूट पड़े हैं तो आप अपना अजेंडा पेल रहे हैं, फिर आपके साथ वह विशेष वर्ग अपने तरीके से ‘निपट’ रहा है तो शिकायत मत करिए. व्यंग्य सभी पर कीजिये. लेकिन स्टैंड अप कॉमेडी की एक बहुत बड़ी खासियत है कि वो जीवन की कड़वी सच्चाइयों पर कटाक्ष करता है. करुणेश तलवार का नया स्टैंड अप स्पेशल ‘आलस मोटापा घबराहट’ हाल ही में अमेज़ॉन प्राइम वीडियो पर रिलीज हुआ और वो अपने आप पर ही कटाक्ष करते नजर आते हैं.

करुणेश तलवार, स्टैंड अप कॉमेडी के लिए जाने जाते हैं. करुणेश के पिता ने वीसीआर खरीदा था और उसके बाद करुणेश को एहसास हुआ कि वो कॉमेडी करना चाहते है और रोज़मर्रा की ज़िन्दगी पर कॉमेडी हो सकती है. उन्होंने कई ओपन माइक में भाग लिया और वहां कॉम्पिटिशन जीतीं, कैफे और बार में परफॉर्म किया और अपने लिए एक खास मुकाम हासिल किया. उनका पहला परफॉरमेंस 2011 में था और उस वक़्त वो आसपास की विसंगतियों पर टीका कर रहे थे. लोगों को बहुत मजा आया और करुणेश को उनसे दोगुना. इतना मजा की शो खत्म कर के वो वेन्यू से बाहर निकले और एक किलोमीटर पैदा ही चलते रहे. कुछ साल बाद भारत के प्रसिद्ध स्टैंड अप कॉमेडियन वीर दास ने एक ‘ओपन माइक’ कॉम्पिटिशन आयोजित की थी.

करुणेश ने उसमें भाग लिया और उनकी जिन्दगी में स्टैंड अप कॉमेडी की पूंछ लग गई. देश के अन्य स्टैंडअप कॉमेडियन जैसे रोहन जोशी, गुरसिमरन खम्भा, तन्मय भट्ट और आशीष शाक्य सब वीर दास के साथ काम करने लगे. देश के सबसे कॉन्ट्रोवर्शियल स्टैंडअप समूह एआईबी के साथ उन्होंने बतौर स्क्रिप्ट राइटर काम किया लेकिन साथ साथ वो अपने लिए कुछ लिख रहे थे. उन्होंने लाइव ऑडियंस के सामने परफॉर्म करने का काम जारी रखा और धीरे-धीरे वो सफल होते चले गए. हिंदी फिल्म इंडस्ट्री और मास्टर शेफ ऑस्ट्रेलिया पर किये गए उनके एक्ट बहुत पसंद किये गए.

अमेजॉन प्राइम वीडियो ने उनका दूसरा स्पेशल ‘आलस मोटापा घबराहट’ हाल ही में रिलीज किया है. इसके पहले 2019 में करुणेश का पहला स्पेशल ‘पता नहीं पर बोलना है’ आया था जो बहुत पसंद किया गया था. करुणेश का ये स्पेशल बहुत खास है क्योंकि इसमें गालियां नहीं हैं. और सबसे बड़ी बात, इस स्पेशल में कोई खास नहीं है. लॉक डाउन में बंद एक नौजवान के कुछ ऑब्जर्वेशन्स हैं. अपने परिवार, खास कर माता-पिता को घर में देख कर उसके मन में जो-जो ख्याल आते गए, वो सब करुणेश ने प्रस्तुत किये हैं. शुरू में ही करुणेश साफ कर देते हैं कि लोग आजकल किसी भी बात पर नाराज़ हो जाते हैं इसलिए वो अपने परिवार या गर्लफ्रेंड पर ही जोक सुनाएंगे, क्योंकि कुल जमा 3-4 टॉपिक ही बचे हैं जिस पर लोग नाराज नहीं होते. लेकिन लोग फिर भी नाराज होंगे क्योंकि मैं कैसे मां-बाप की इज्जत नहीं करता. अपने पिता के प्रिय डायलॉग ‘अच्छे लोगों के साथ अच्छा ही होता है’ का एक नया अंदाज आप देख पाएंगे. यही नहीं, करुणेश अपनी गर्लफ्रेंड का भी मजाक उड़ाते नजर आते हैं कि कैसे पहले उन्हें करुणेश में दिलचस्पी ही नहीं थी और कैसे उन्होंने अपने ख्याल बदले.

करुणेश की खासियत है कि वो अक्सर हिंदी फिल्मों पर एक नया नजरिया प्रस्तुत करते हैं लेकिन वो हर शो में खुद का ही मजाक उड़ाते रहते हैं. कभी वो खुद के मोटापे से परेशान हैं तो कभी पिताजी के आलस्य से. कोई भी बात हो, घबराना उनके परिवार का स्थायी भाव है और क्यों हैं. करुणेश जैसे स्टेज से परे हैं वैसे ही स्टेज पर हैं. वो कोई कैरेक्टर वॉइस नहीं करते. ऐसा लगता है बात करते करते करुणेश स्टेज पर परफॉर्म करने लगे हैं. उनकी ज़िन्दगी पर उन्हीं की टिप्पणी इतनी मज़ाकिया है कि आप हँसे बगैर रह नहीं सकते. जैसे वो कहते हैं कि मेरे माता पिता नाराज हैं और चाहते हैं कि मैं स्टैंड अप में उनका मज़ाक न उड़ाया करूँ लेकिन फिर वो अमेज़ॉन से मिले चेक को देखते हैं तो और नए नए किस्से सुनाने लगते हैं. माता पिता को अपनी शख्सियत से परिचित करवाते रहिये, क्योंकि उन्हें भी तो आयडिया हो कि आप कितना बिगड़ गए हैं, ये सोचते हैं करुणेश इस स्पेशल में.

ये अमेजॉन स्पेशल करुणेश की क्षमता का अच्छा नमूना है और इसे देखा जाना चाहिए. सहज, सरल, जिन्दगी के तजुर्बों से बना हास्य.

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